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Wednesday, April 25, 2012

बाकी के ९९ रूपये कहाँ हैं


Saturday, April 7, 2012

ज़िन्दगी सवालों के जवाब ढुंढने चली


ज़िन्दगी सवालों के जवाब ढुंढने चली
ज़वाब में सवालों की एक लम्बी सी लढी मिली,
सवाल ही सवाल है
कि सुझती नहीं गली
कि आज हाथ थाम लो, एक हाथ की कमी खली॰॰॰॰॰॰॰॰

Monday, May 30, 2011

1 सरदार....

1 सरदार....

सिर्फ 1  सरदार..
पूरी जिन्दगी सूचता रहा, और सोचते सोचते पागल हो गया |
कि मेरी बहन के 3 भाई हैं तो मेरे 2 कैसे....
तुम भी सोचो.... 

Thursday, February 3, 2011

गब्बर सिंह का चरित्र चित्रण

1. सादा जीवन, उच्च विचार: उसके जीने का ढंग बड़ा सरल था. पुराने और मैले कपड़े, बढ़ी हुई दाढ़ी, महीनों से जंग खाते दांत और पहाड़ों पर खानाबदोश जीवन. जैसे मध्यकालीन भारत का फकीर हो. जीवन में अपने लक्ष्य की ओर इतना समर्पित कि ऐशो-आराम और विलासिता के लिए एक पल की भी फुर्सत नहीं. और विचारों में उत्कृष्टता के क्या कहने! 'जो डर गया, सो मर गया' जैसे संवादों से उसने जीवन की क्षणभंगुरता पर प्रकाश डाला था.

. दयालु प्रवृत्ति: ठाकुर ने उसे अपने हाथों से पकड़ा था. इसलिए उसने ठाकुर के सिर्फ हाथों को सज़ा दी. अगर वो चाहता तो गर्दन भी काट सकता था. पर उसके ममतापूर्ण और करुणामय ह्रदय ने उसे ऐसा करने से रोक दिया.

3.
नृत्य-संगीत का शौकीन: 'महबूबा ओये महबूबा' गीत के समय उसके कलाकार ह्रदय का परिचय मिलता है. अन्य डाकुओं की तरह उसका ह्रदय शुष्क नहीं था. वह जीवन में नृत्य-संगीत एवंकला के महत्त्व को समझता था. बसन्ती को पकड़ने के बाद उसके मन का नृत्यप्रेमी फिर से जाग उठा था. उसने बसन्ती के अन्दर छुपी नर्तकी को एक पल में पहचान लिया था. गौरतलब यह कि कला के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने का वह कोई अवसर नहीं छोड़ता था.

4.
अनुशासनप्रिय नायक: जब कालिया और उसके दोस्त अपने प्रोजेक्ट से नाकाम होकर लौटे तो उसने कतई ढीलाई नहीं बरती. अनुशासन के प्रति अपने अगाध समर्पण को दर्शाते हुए उसने उन्हें तुरंत सज़ा दी.

5.
हास्य-रस का प्रेमी: उसमें गज़ब का सेन्स ऑफ ह्यूमर था. कालिया और उसके दो दोस्तों को मारने से पहले उसने उन तीनों को खूब हंसाया था. ताकि वो हंसते-हंसते दुनिया को अलविदा कह सकें. वह आधुनिक यु का 'लाफिंग बुद्धा' था.

6.
नारी के प्रति सम्मान: बसन्ती जैसी सुन्दर नारी का अपहरण करने के बाद उसने उससे एक नृत्य का निवेदन किया. आज-कल का खलनायक होता तो शायद कुछ और करता.

7.
भिक्षुक जीवन: उसने हिन्दू धर्म और महात्मा बुद्ध द्वारा दिखाए गए भिक्षुक जीवन के रास्ते को अपनाया था. रामपुर और अन्य गाँवों से उसे जो भी सूखा-कच्चा अनाज मिलता था, वो उसी से अपनी गुजर-बसर करता था. सोना, चांदी, बिरयानी या चिकन मलाई टिक्का की उसने कभी इच्छा ज़ाहिर नहीं की.

8.
सामाजिक कार्य: डकैती के पेशे के अलावा वो छोटे बच्चों को सुलाने का भी काम करता था. सैकड़ों माताएं उसका नाम लेती थीं ताकि बच्चे बिना कलह किए सो जाएं. सरकार ने उसपर 50,000 रुपयों का इनाम घोषित कर रखा था. उस युग में 'कौन बनेगा करोड़पति' ना होने के बावजूद लोगों को रातों-रात अमीर बनाने का गब्बर का यह सच्चा प्रयास था.

9.
महानायकों का निर्माता: अगर गब्बर नहीं होता तो जय और व??रू जैसे लुच्चे-लफंगे छोटी-मोटी चोरियां करते हुए स्वर्ग सिधार जाते. पर यह गब्बर के व्यक्तित्व का प्रताप था कि उन लफंगों में भी महानायक बनने की क्षमता जागी.


Cheers !!!


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Thursday, January 27, 2011

इंतज़ार करने वाले को सिर्फ उतना मिलता है

इंतज़ार करने वाले को सिर्फ उतना मिलता है, जितना कोशिश करनेवाले छोड़ देते है !

Sunday, January 9, 2011

यू तो चाहने वाले कुछ कम न मिलेंगे

यू तो चाहने वाले कुछ कम न मिलेंगे !
मिल जायंगे हम जैसे पर हम न मिलेंगे !!

Thursday, December 2, 2010

क्या बनाने आये थे क्या बना बैठे,

क्या बनाने आये थे क्या बना बैठे, कहीं मंदिर बना बैठे कहीं मस्जिद बना बैठे !
हमसे तो जात अच्छी है परिंदों की, कभी मंदिर पर जा बैठे तो कभी मस्जिद पर जा बैठे !!

Friday, October 29, 2010

एक छोटी सी लव स्टोरी

दो चिडियों की प्रेम कहानी, एक दिन फिमेल चिड़िया ने बोला की मुझे छोडकर कही तुम उड़ तो नहीं जाओगे, मेल चिड़िया बोली उड़ जाऊंगा तो तुम पकड़ लेना.
फिमेल चिड़िया बोली मै तुम्हे पकड़ सकती हु पर फिर पा नहीं सकती, मेल चिड़िया की आँखों में आंसू आगये और उसने अपने पंख तोड़ दिए और बोला अब हम हमेशा साथ रहेंगे।
एक दिन जोर से तूफान आने वाला था तो फिमेल चिड़िया उड़ने लगी तभी मेल चिड़िया ने कहा तुम उड़ जाओ मै नहीं उड़ सकता

फिमेल चिड़िया बोली अपना ख्याल रखना कहकर उड़ गयी जब तूफान थमा तो फिमेल चिड़िया वापस उस पेड़ पर आई तो देखा कि मेल चिड़िया मर चुकी थी और एक डाली पर लिखा था.
कास एक बार तो कहती कि मै तुम्हे नहीं छोड़ सकती तो शायद मै तूफान आने से पहले नहीं मरता

moral : For females love exist till the circumstances are good

Thursday, August 5, 2010

मनुष्य को कभी भी अपना अच्छा स्वभाव नहीं भूलना चाहिए।

एक बार एक भला आदमी नदी किनारे बैठा था। तभी उसने देखा एक बिच्छू पानी में गिर गया है। भले आदमी ने जल्दी से बिच्छू को हाथ में उठा लिया। बिच्छू ने उस भले आदमी को डंक मार दिया। बेचारे भले आदमी का हाथ काँपा और बिच्छू पानी में गिर गया।
भले आदमी ने बिच्छू को डूबने से बचाने के लिए दुबारा उठा लिया। बिच्छू ने दुबारा उस भले आदमी को डंक मार दिया। भले आदमी का हाथ दुबारा काँपा और बिच्छू पानी में गिर गया।

भले आदमी ने बिच्छू को डूबने से बचाने के लिए एक बार फिर उठा लिया। वहाँ एक लड़का उस आदमी का बार-बार बिच्छू को पानी से निकालना और बार-बार बिच्छू का डंक मारना देख रहा था। उसने आदमी से कहा, "आपको यह बिच्छू बार-बार डंक मार रहा है फिर भी आप उसे डूबने से क्यों बचाना चाहते हैं?"
भले आदमी ने कहा, "बात यह है बेटा कि बिच्छू का स्वभाव है डंक मारना और मेरा स्वभाव है बचाना। जब बिच्छू एक कीड़ा होते हुए भी अपना स्वभाव नहीं छोड़ता तो मैं मनुष्य होकर अपना स्वभाव क्यों छोड़ूँ?"

मनुष्य को कभी भी अपना अच्छा स्वभाव नहीं भूलना चाहिए।
 
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