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Tuesday, September 22, 2009

आसमा लाख ऊंचा ही मगर झुक जाता है

आसमा लाख ऊंचा ही मगर झुक जाता है
दोस्ती में दुनिया लाख बने रूकावट
अगर दोस्त सच्चा तो खुदा भी झुक जाता है.

दोस्ती वो एहसास है जो मिटता नहीं
दोस्ती वो पर्वत है जो झुकता नहीं
इसकी कीमत क्या पूछो हमसे
ये वो अनमोल मोती है जो बिकता नहीं

सच्ची है दोस्ती आजमा के देखो
करके यकीन मुझपे मेरे पास आके देखो
बदलता नहीं कभी सोना अपना रंग कभी
चाहे जितनी बार आग में जला कर के देखो


दर्द जितना सहा जाये उतना ही सहना
दिल जो लग जाये वो बात न कहना
मिलते है हमारे जैसे दोस्त बहुत कम इसलिये
कभी न GOOD BYE मत कहना दोस्ती सच्ची हो तो वक़्त रूक जाता है
आसमा लाख ऊंचा ही मगर झुक जाता है
दोस्ती में दुनिया लाख बने रूकावट
अगर दोस्त सच्चा तो खुदा भी झुक जाता है.

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